



आईएसआई गिरिडीह में राष्ट्रीय ग्रामीण उद्यमिता शिखर सम्मेलन आयोजित
डीजे न्यूज, गिरिडीह : भारतीय सांख्यिकीय संस्थान, गिरिडीह में राष्ट्रीय ग्रामीण उद्यमिता शिखर सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और विकास विशेषज्ञों ने उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एक साथ भाग लिया। यह शिखर सम्मेलन जाने-माने समाजशास्त्री प्रो. आंद्रे बेतेई के सम्मान में समर्पित था, जिनका हाल ही में निधन हो गया और जिनके कार्यों ने समानता तथा सामाजिक न्याय के विचारों में स्थायी योगदान दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. हरि चरण बेहेरा ने किया। उन्होंने गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अपने उद्घाटन भाषण में ग्रामीण समुदायों के लचीलेपन और नवीन क्षमताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण आबादी सरकारी योजनाओं और संस्थागत समर्थन का उपयोग कर उद्यम स्थापित कर अपनी आजीविका में सुधार कर रही है। सभा का स्वागत करते हुए आईएसआई गिरिडीह के प्रभारी प्रो. अभिषेक मुखर्जी ने अनुसंधान और विकास के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारतीय सांख्यिकीय संस्थान, कोलकाता के कार्यवाहक निदेशक प्रो. अयानेंद्रनाथ बासु ने आभासी माध्यम से सभा को संबोधित किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने पर खेद व्यक्त करते हुए उन्होंने शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्तव्य देते हुए हैदराबाद विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. पी. वेंकट राव ने ग्रामीण उद्यमिता का अध्ययन करने वाले एक सामाजिक मानवविज्ञानी के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया पहल ने स्टार्टअप तंत्र का काफी विस्तार किया है, जिसमें स्टार्टअप की संख्या 2015 में लगभग 500 से बढ़कर आज 10,000 से अधिक हो गई है और यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर 105 से अधिक हो गई है। प्रो. राव ने ग्रामीण उद्यमिता को एक व्यापक श्रेणी बताया जिसमें छोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े निगमों तक के उद्यम शामिल हैं। उन्होंने कृषि संकट, बेरोजगारी, प्रवासन, भूमिहीनता और सीमित गैर-कृषि रोजगार के अवसरों जैसी चुनौतियों से निपटने में इसके महत्व को रेखांकित किया तथा उद्यमी गतिविधि पर जाति, धर्म और सामुदायिक नेटवर्क के प्रभाव पर भी चर्चा करते हुए अधिक प्रभावी विकास कार्यक्रम तैयार करने के लिए पूर्व नीतिगत हस्तक्षेपों से सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के जिला विकास प्रबंधक श्री आशुतोष प्रकाश ने जमीनी स्तर पर काम करने वाली एक प्रमुख विकास वित्त संस्था के रूप में संस्था की भूमिका बताई। उन्होंने ग्रामीण लोगों की आजीविका बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं और विकास पहलों की जानकारी दी। श्री प्रकाश ने बताया कि संस्था ने 70 करोड़ रुपये के ऋण के माध्यम से गिरिडीह में बड़े पाइप वाले पेयजल आपूर्ति और मेगा सिंचाई परियोजना को सहयोग दिया है तथा जिले में बड़े पैमाने पर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाले डेयरी संयंत्र स्थापित करने के प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्था की पहुंच ग्रामीण जीवन के लगभग हर पहलू को स्पर्श करती है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने ग्रामीण विकास और आजीविका सशक्तीकरण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।





