आईआईटी (आईएसएम) में तीन दिनी जियोकंफ्लुएंस  का शुभारंभ स्पष्ट लक्ष्य रखकर आगे की दिशा तय करें छात्र: डा. इंद्रनील साहा

Advertisements

आईआईटी (आईएसएम) में तीन दिनी जियोकंफ्लुएंस  का शुभारंभ

स्पष्ट लक्ष्य रखकर आगे की दिशा तय करें छात्र: डा. इंद्रनील साहा

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के अप्लाइड जियोफिजिक्स विभाग और जियोफिजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय जियोकंफ्लुएंस कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को पेनमैन ऑडिटोरियम में हुआ। यह आयोजन संस्थान के शताब्दी वर्ष समारोह का भी हिस्सा है। कार्यक्रम में देशभर से छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. धीरज कुमार, उप निदेशक, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने की। टाटा स्टील के डॉ. इन्द्रनील साहा (चीफ माइन प्लानिंग) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. मधुर जोहरी (बीपी, NWS डिसिप्लिन लीड) विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. इन्द्रनील साहा ने छात्रों से सहज और अनुभव आधारित संवाद किया। उन्होंने कहा कि वह कोई प्रेरक वक्ता नहीं हैं, लेकिन अपने करियर के अनुभवों के जरिए युवाओं को व्यावहारिक सीख देना चाहते हैं। उन्होंने भू-विज्ञान की अवधारणा “वर्तमान ही अतीत की कुंजी है” का उदाहरण देते हुए छात्रों को अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने और आगे की दिशा तय करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि स्नातक के बाद उन्हें कैंपस प्लेसमेंट नहीं मिला था, लेकिन उच्च शिक्षा और मेहनत के जरिए उन्होंने अपना रास्ता बनाया। उन्होंने छात्रों को लक्ष्य तय करने, सही योजना बनाने, फोकस बनाए रखने और समय सीमा का पालन करने पर जोर दिया। साथ ही शोध कार्य में “कॉपी-पेस्ट” से बचते हुए नवाचार पर ध्यान देने की अपील की।
डॉ. साहा ने कहा कि आज जियोसाइंस क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए छात्रों को GIS, AI/ML, ड्रोन टेक्नोलॉजी और आधुनिक जियोफिजिकल टूल्स जैसी नई तकनीकों को सीखते रहना चाहिए, खासकर भारत में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर बढ़ती जरूरतों के संदर्भ में। उन्होंने मेहनत, धैर्य, निरंतर सीखने की आदत, टीमवर्क और फील्ड-आधारित अनुभव को सफलता की कुंजी बताया।
प्रो. सौमेन मैती, विभागाध्यक्ष, अप्लाइड जियोफिजिक्स ने कहा कि जियोकंफ्लुएंस एक ऐसा मंच है जहां छात्र, वैज्ञानिक, उद्यमी और उद्योग विशेषज्ञ मिलकर समाज और उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर सार्थक चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने विभाग की उपलब्धियों और 1957 के इंटरनेशनल जियोफिजिकल ईयर से जुड़ी विरासत का उल्लेख करते हुए बताया कि विभाग ने हाइड्रोकार्बन, खनिज और ऊर्जा अन्वेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, क्विज, पोस्टर प्रस्तुतियां, जियो-टूर और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं।
स्वागत संबोधन में प्रो. पार्थ प्रतिम मंडल ने जियोकंफ्लुएंस को विभाग का प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम बताते हुए आयोजन की शताब्दी थीम
एक सदी के अतीत और उससे परे पर प्रकाश डाला और आयोजन को सफल बनाने वाले सभी आयोजकों व स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. धीरज कुमार ने विभाग की मजबूत पहचान और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि GSI जैसी संस्थाओं में कार्यरत कई वैज्ञानिक इस विभाग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से विभाग की विरासत बनाए रखने तथा गुणवत्ता और नेतृत्व क्षमता को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top