आईआईटी (आईएसएम) में बीएमईएस राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ गणितीय मॉडलिंग और अर्थ साइंस से जुड़े आधुनिक विषयों पर हुई चर्चा

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आईआईटी (आईएसएम) में बीएमईएस राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

गणितीय मॉडलिंग और अर्थ साइंस से जुड़े आधुनिक विषयों पर हुई चर्चा

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एप्लाइड जियोफिजिक्स विभाग और जियोफिजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय कार्यशाला बीएमईएस का उद्घाटन शनिवार को टेक्समिन स्मार्ट क्लासरूम में हुआ। यह दो दिवसीय कार्यशाला 17 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिक शोध विषयों पर चर्चा करना और प्रतिभागियों के लिए क्षमता विकास को बढ़ावा देना है। इस कार्यशाला में खासतौर पर मैथेमेटिकल मॉडलिंग और पृथ्वी विज्ञान से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पर फोकस किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक ने की। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ओ. पी. मिश्रा, निदेशक, नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर (NCS), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोज कुमार अग्रवाल, चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर, बीसीसीएल (BCCL) शामिल हुए। कार्यशाला के कन्वीनर प्रो. पार्थ प्रतिम मंडल हैं तथा को-कन्वीनर प्रो. निप्टिका जाना हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. सौमेन मैती ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पृथ्वी विज्ञान की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान तक पहुंचने के लिए गणितीय मॉडलिंग, डेटा एनालिसिस और आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों और शोधार्थियों को नए विषयों से जोड़ने के साथ-साथ इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के बीच बेहतर संवाद बनाने में मदद करती हैं।
अपने संबोधन में विशिष्ट अतिथि श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने माइन सेफ्टी के लिए गणितीय मॉडलिंग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने, जोखिम का अनुमान लगाने तथा निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने में मॉडलिंग काफी उपयोगी साबित होती है। उन्होंने कोल क्वालिटी क्लासिफिकेशन में भी वैज्ञानिक तरीकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि डेटा आधारित सिस्टम और टेक्नोलॉजी से बेहतर प्लानिंग और ऑपरेशन संभव होता है। उन्होंने बीसीसीएल की “Science in Action” नीति का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी वैज्ञानिक सोच को सीधे काम में उतारने और तकनीक आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्य अतिथि डॉ. ओ. पी. मिश्रा ने कहा कि भूकंपीय अध्ययन और पृथ्वी की गतिविधियों को समझने के लिए आज उन्नत विश्लेषण और मॉडलिंग की जरूरत बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि इस तरह के राष्ट्रीय मंच प्रतिभागियों को नए टूल्स और पद्धतियों से परिचित कराते हैं तथा देश में वैज्ञानिक क्षमता निर्माण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक ने कहा कि संस्थान का मकसद सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के लिए काम करने और नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने से भी जुड़ा है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने शोध और तकनीकी ज्ञान को देश की जरूरतों के अनुरूप दिशा दें और “विकसित भारत” के लक्ष्य में योगदान करें।
कार्यक्रम का समापन प्रो. निप्टिका जाना द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, संस्थान प्रशासन, वक्ताओं, आयोजकों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार प्रकट किया।
BMES-2026 के तहत अगले दो दिनों में TEXMiN स्मार्ट क्लासरूम में कई तकनीकी सत्र, आमंत्रित विशेषज्ञ व्याख्यान और पोस्टर प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। कार्यशाला के दौरान “Geosciences in the Emerging World” विषय पर पैनल डिस्कशन भी रखा गया है। कार्यक्रम में अकादमिक सत्रों के साथ सांस्कृतिक एवं नेटवर्किंग गतिविधियां भी शामिल हैं। समापन दिवस पर अतिरिक्त तकनीकी सत्रों के बाद वलिडिक्ट्री सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागी फीडबैक, प्रमाणपत्र वितरण और समापन टिप्पणी शामिल होगी।

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