गजलीटांड खान हादसा: भूमिगत खदान के अंदर पानी घुस जाने से 64 कोयला कर्मियों ने ली थी जलसमाधि

गजलीटांड खान हादसा: भूमिगत खदान के अंदर पानी घुस जाने से 64 कोयला कर्मियों ने ली थी जलसमाधि

भौगोलिक-सामाजिक स्थितियां बदली, नहीं बदला खान हादसे के कारणों के खुलासे का इंतजार, श्रद्धांजलि सभा कल

तरुण कांति घोष, कतरास(धनबाद): 25 सितंबर 1995 की रात धनबाद जिले के भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के कतरास क्षेत्र संख्या -04 के गजलीटांड़ कोलियरी में हुई खान हादसा देश की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है। उस दिन मूसलाधार बारिश हुई थी। लगभग 331 मिमी बारिश रिकार्ड किया गया था। गजलीटांड़ के पास की कतरी नदी का तटबंध टूट गया और सारा पानी गजलीटांड़  कोलियरी की 06 नंबर भूमिगत खदान के 10 नंबर सीम में भर गया। खदान के अंदर पानी भर जाने से वहां काम कर रहे 64 कोयला कर्मियों ने जलसमाधि ले ली थी।

26 सितंबर को मचा हाहाकार

इस घटना के बाद 26 सितंबर की सुबह गजलीटांड़ में हाहाकर मच गया था। जलसमाधि लेने वाले कर्मियों के परिजनों की करुण क्रंदन से पूरा इलाका दहल उठा था। बीसीसीएल की लापरवाही पर आमजनों के साथ साथ श्रमिक संगठनों में उबाल था।

गजलीटांड़ की आंच बिहार से दिल्ली तक

धनबाद जिले में हुई इतनी बड़ी घटना की गूंज बिहार से दिल्ली तक पहुंची। घटना के बाद तत्कालीन कोयला मंत्री जगदीश टाइटलर, एकीकृत बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जैसे राजनीतिक हस्तियों के अलावा बीसीसीएल के तत्कालीन सीएमडी जीसी मृग सहित कई जनप्रतिनिधि गजलीटांड पहुंचे थे।
घटना के बाद जलसमाधि लिए कर्मियों के आश्रितों को तत्काल नियोजन, कंपनी की वित्तीय सहायता, केंद्र व राज्य सरकार की ओर से सहायता, आपदा राहत कोष से आर्थिक मदद की गई थी।

इस घटना के लंबा अर्सा बीत गया। इस अवधि में खदान के आसपास क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक व आर्थिक स्थितियां बदल गई। भूमिगत खदान से लेकर आउटसोर्सिंग के माध्यम से चले खुली खदान तक के सफर में गजलीटांड में कुछ नहीं बदला तो वह है खान हादसे के कारणों के खुलासा का इंतजार। शहीद हुए कोल कर्मियों के शव के अवशेष भी भूमिगत खदान के अंदर से बाहर नहीं निकाला जा सका। साथ ही हादसे के बाद गठित मुखर्जी कमेटी की जांच का भी आज तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

25 सितंबर 1995 की वह काली रात

25 सितंबर 1995 की वह काली रात गजलीटांड कोलियरी सहित बीसीसीएल के अन्य भूमिगत खदानों के लिए प्रलयंकारी रात बनकर आई थी। गजलीटांड सहित कंपनी के अन्य जगहों के 79 कोलकर्मी काल कवलित हुए थे। सिर्फ गजलीटांड कोलियरी के छह नंबर भूमिगत खदान के 10 नंबर सिम में 64 कोलकर्मी काल के गाल में समा गए थे। गजलीटांड के अलावा चैतुडीह खदान में चार, साउथ गोविदपुर में तीन, बेरा कोलियरी में तीन, निचितपुर कोलियरी में दो, केशलपुर कोलियरी में एक कर्मी ने जलसमाधि ली थी।

नहीं निकला मुखर्जी कमेटी की जांच का निष्कर्ष

घटना के बाद खान हादसे की जांच के लिए जस्टिस एस मुखर्जी की अध्यक्षता में मुखर्जी कमीशन/कोर्ट आफ इंक्वाइरी का गठन किया गया था। कमेटी में एसेसर (जस्टिस को सलाह देने वाला व्यक्ति) इंटक के तत्कालीन महामंत्री स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह तथा भारतीय खनिज विद्यापीठ के प्रोफेसर एस मजूमदार बनाए गए थे। लंबे समय तक जांच हुई, कार्रवाई चली, लेकिन नतीजा आज तक सामने नहीं आया। हर साल श्रद्धांजलि देने की परंपरा दोहराई जाती है। लेकिन इस खान हादसे का दोषी कौन था, इस पर पर्दा नहीं उठ सका है। घटना का रहस्य इतिहास के पन्नों में दबकर रह गया है।‌

श्रद्धांजलि सभा कल

शहीद कर्मियों की याद में गजलीटांड स्थित शहीद स्तंभ पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है। शहीदों की स्मृति में फुटबॉल प्रतियोगिता होती है। गजलीटांड में 26 सितंबर की सुबह से कुरान व गीता पाठ की गूंज सुनाई देती है। शहीद के परिजनों के अलावा बीसीसीएल के उच्चाधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दल के नेता, श्रमिक संगठन, सामाजिक संगठन से जुड़े लोग गजलीटांड आकर शहीद स्तंभ पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

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