रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल बाद आया फैसला, हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा बरी 23 गवाहों की हुई थी गवाही

रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल बाद आया फैसला, हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा बरी

23 गवाहों की हुई थी गवाही

डीजे न्यूज, धनबाद: धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल बाद शनिवार को अदालत का फैसला आया है। हत्या और साजिश के आरोप में आरोपी हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा को अदालत ने बरी कर दिया है। लंबे समय तक चले ट्रायल में कुल 23 गवाहों की गवाही दर्ज की गई थी। अंतिम बहस पूरी होने के बाद शनिवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया। फैसले को लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

रंजय सिंह की 29 जनवरी 2017 को सरायढेला थाना क्षेत्र के चाणक्य नगर मोड़ के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने गोलीबारी कर दी। गोली लगने से रंजय सिंह की मौत हो गई, जबकि राजा यादव बाल-बाल बच गए। बाद में राजा यादव को मामले का प्रमुख चश्मदीद गवाह बनाया गया।

पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा और करीब नौ वर्षों तक मुकदमे की सुनवाई चली। इस दौरान कुल 23 गवाहों की गवाही दर्ज हुई। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह उर्फ मामा को बरी कर दिया।

फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। सभी थाना प्रभारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। वरीय पुलिस अधिकारियों की निगरानी में कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।

नंदकुमार सिंह उर्फ मामा फिलहाल रांची के होटवार जेल में बंद है। शनिवार को उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई।

फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता समर श्रीवास्तव ने इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष लगातार यह पक्ष रखता रहा कि नंदकुमार सिंह उर्फ मामा की पहचान गोली चलाने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं हुई थी और उसका घटना से कोई संबंध नहीं था। वहीं हर्ष सिंह के रिश्तेदार अभिषेक सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत के फैसले से न्याय की जीत हुई है।

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