स्वस्थ पशुधन, समृद्ध किसान के संकल्प के साथ मिशन मोड में चलेगा निःशुल्क एफएमडी टीकाकरण अभियान
गांडेय में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान को लेकर आजीविका पशु सखियों का प्रशिक्षण
डीजे न्यूज, गांडेय (गिरिडीह): गांडेय प्रखंड के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उदय मेहता ने गांडेय आजीविका संकुल संगठन स्वावलम्बी सहयोग समिति लिमिटेड कार्यालय में जेएसएलपीएस की आजीविका पशु सखियों को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान से संबंधित प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि प्रखंड के विभिन्न गांवों में मिशन मोड में पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण किया जाएगा, जिसे आजीविका पशु सखियों और पाराभेट के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. उदय मेहता ने कहा कि खुरपका-मुंहपका पशुओं की एक गंभीर संक्रामक बीमारी है और इससे बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है। उन्होंने बताया कि जब यह बीमारी किसी गांव में फैल जाती है तो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए वर्तमान अभियान के तहत मिशन मोड में निःशुल्क टीकाकरण कराया जाएगा, जिससे पशुओं को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने सभी पशु सखियों को खुरपका-मुंहपका बीमारी की पहचान, उसके दुष्प्रभाव तथा टीकाकरण के लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
मौके पर जेएसएलपीएस के एफटीसी रामचंद्र चौधरी ने कहा कि पशुपालकों को अधिक से अधिक जागरूक करना और इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाना आजीविका पशु सखियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ पशुधन, समृद्ध किसान, यही है समृद्ध गांव की पहचान” के संकल्प के साथ इस अभियान को सफल बनाना है। उन्होंने कहा कि पशुधन पशुपालकों के लिए एटीएम की तरह है। कृषि कार्य, दुग्ध उत्पादन तथा ऑर्गेनिक खाद सहित कई आवश्यक जरूरतें पशुधन से पूरी होती हैं, जो किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
कार्यक्रम में प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक संदीप मिंज, सामुदायिक समन्वयक टीपू सुल्तान, एफटीसी रविंद्र के. वर्मा, एआईपीआरपी उदय कुमार वर्मा, आईएफसी एंकर तालों सोरेन, सर्वर आलम, पशु सखी धनेश्वरी देवी, दुलारी देवी, सलीमा खातून, गुलफ़्सा खातून, हेमलता देवी, राधिका देवी, पुष्पा देवी, नीतू देवी सहित बड़ी संख्या में आजीविका पशु सखियां उपस्थित थीं।
कार्यक्रम के अंत में संकुल की अध्यक्ष कुसुम कुमारी एवं लेखपाल जया कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से संकुल के सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने में सहायता मिलती है।