



एनएचपीसी लिमिटेड के अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय ईडीपी का शुभारंभ

डीजे न्यूज, धनबाद: आइआइटी-आइएसएम धनबाद के प्रबंधन अध्ययन एवं औद्योगिक अभियांत्रिकी विभाग द्वारा बुधवार को
विद्युत परियोजनाओं के कार्यशील पूंजी प्रबंधन
विषय पर तीन दिवसीय एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम (EDP) की शुरुआत की गई। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड
(NHPC Ltd.) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसमें एनएचपीसी के कॉरपोरेट ऑफिस तथा देशभर की विभिन्न परियोजनाओं से आए 20 वरिष्ठ एवं मध्य-स्तरीय वित्त अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिनमें सीनियर मैनेजर, ग्रुप सीनियर मैनेजर और डिप्टी जनरल मैनेजर शामिल हैं।
उद्घाटन सत्र में प्रो. एम. के. सिंह, कार्यवाहक निदेशक, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद; प्रो. केका ओझा, डीन (सीईपी); प्रो. जे. के. पटनायक; तथा कार्यक्रम समन्वयक प्रो. रश्मि सिंह और प्रो. निलाद्रि दास उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रो. एम. के. सिंह ने बड़े जलविद्युत परियोजनाओं में मजबूत वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्किंग कैपिटल की सही योजना, लागत नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन से ही परियोजनाओं को समय पर और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. निलाद्रि दास ने विभाग और एनएचपीसी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 से अब तक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, कॉरपोरेट प्लानिंग और फाइनेंशियल मैनेजमेंट जैसे विषयों पर कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
प्रो. रश्मि सिंह ने जलविद्युत परियोजनाओं में आधुनिक सिमुलेशन सॉफ्टवेयर और उन्नत स्प्रेडशीट टूल्स के उपयोग की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन सस्टेनेबिलिटी और हाइड्रो पावर परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही फ्लोटिंग सोलर सेल्स, स्ट्रैटेजिक वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट, लागत से जुड़े मुद्दे और पावर प्रोजेक्ट्स के वित्तीय विश्लेषण पर भी सत्र आयोजित किए गए।
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम सिद्धांत और व्यवहारिक पहलुओं का समन्वय करते हुए प्रतिभागियों को आधुनिक वित्तीय उपकरणों और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से परिचित कराएगा, जिससे पावर सेक्टर में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सके।




