



आइआइटी-आइएसएम पहुंची ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ बस— भारत की अंतरिक्ष यात्रा से रूबरू होने का अनोखा मौका

डीजे न्यूज, धनबाद: आइआइटी-आइएसएम का परिसर इन दिनों अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक दुनिया से सराबोर है। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) हैदराबाद द्वारा संचालित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की आउटरीच पहल “स्पेस ऑन व्हील्स” बस यहाँ पहुँच चुकी है। यह सिर्फ एक प्रदर्शनी बस नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का चलता-फिरता संग्रहालय है, जो रॉकेट, उपग्रह और अंतरग्रहीय मिशनों को किताबों से निकालकर सीधे दर्शकों के सामने जीवंत रूप में पेश कर रही है।
बस के भीतर प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे ज्ञान की एक छोटी अंतरिक्ष यात्रा शुरू हो गई हो। यहाँ भारतीय प्रक्षेपण यानों के कार्यशील स्केल मॉडल, रॉकेट लॉन्च के सिमुलेशन और अंतरिक्ष तकनीक के विकास को दर्शाते विस्तृत मॉडल लगाए गए हैं। पृथ्वी की कक्षा में घूमते उपग्रहों और पेलोड सिस्टम के मॉडल यह समझाते हैं कि उपग्रहों को कैसे डिज़ाइन और सुरक्षित रूप से लॉन्च किया जाता है। क्रू एस्केप सिस्टम का मॉडल मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों में सुरक्षा तकनीक को दर्शाता है, जबकि रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के प्रदर्शन यह बताते हैं कि अंतरिक्ष तकनीक रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे काम आती है।
सैटेलाइट इमेजरी के नमूने और इंटरएक्टिव डिस्प्ले मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अध्ययन, आपदा प्रबंधन, कृषि, वन मानचित्रण, जल संसाधन योजना, दूरसंचार, टेलीमेडिसिन, नागरिक उड्डयन और समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष डेटा के उपयोग को सरल तरीके से समझाते हैं। इससे दर्शकों को यह महसूस होता है कि उपग्रह हमारी रोज़मर्रा की सेवाओं को चुपचाप शक्ति दे रहे हैं।

प्रदर्शनी में भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों को दर्शाते मॉडल और दृश्य भी शामिल हैं, जो युवाओं को विज्ञान और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। अर्थ ऑब्जर्वेशन ग्राउंड स्टेशन के डियोरामा यह दिखाते हैं कि उपग्रह डेटा कैसे प्राप्त और प्रोसेस किया जाता है, जबकि प्रोपल्शन सिस्टम के मॉडल रॉकेट इंजनों की कार्यप्रणाली समझाते हैं। शुरुआती उपग्रहों से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की यह यात्रा भारत की प्रगति की कहानी कहती है।
इस पहल को और खास बनाते हैं एनआरएससी के आउटरीच विशेषज्ञ, जो छात्रों से सीधे संवाद कर डेमो, क्विज़ और चर्चाओं के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को आसान भाषा में समझा रहे हैं। यह संवाद जिज्ञासा को प्रेरणा में बदलने का काम कर रहा है।
बुधवार को बस आईआईटी (आईएसएम) पहुँची। परिसर के छात्र, कर्मचारी और उनके परिजन गुरुवार को भ्रमण कर सकते हैं, जबकि अन्य छात्र, पूर्व छात्र और आगंतुक 06 फरवरी से 08 फरवरी तक इस प्रदर्शनी का लाभ उठा सकेंगे। “स्पेस ऑन व्हील्स” सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष गाथा से जुड़ने की प्रेरक यात्रा है।




