



दुबई में फंसे झारखंड के 14 मजदूर, सरकार से वतन वापसी की गुहार

डीजे न्यूज, गिरिडीह :
झारखंड के प्रवासी मजदूर एक बार फिर विदेश में फंस गए हैं। झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो के 14 प्रवासी मजदूर इस बार दुबई में फंसे हुए हैं। कंपनी के द्वारा मजदूरों के बीच काम के बदले मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। साथ ही समय से अधिक काम कराया जा रहा है। इससे मजदूरों को वहां रहने एवं खाने-पीने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विदेश में फंसे मजदूरों ने एक वीडियो भेजकर अपनी पीड़ा को साझा करते हुए सरकार से मदद की अपील की है।प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले सिकन्दर अली को मजदूरों ने वीडियो भेजा है। मजदूरों के द्वारा भेजे गए वीडियो को उन्होंने मीडिया के साथ साझा किया है। सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से मजदूरों के सकुशल वतन वापसी के लिए ठोस कूटनीतिक पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसने वाले मजदूरों का यह कोई पहला मामला नहीं है।इससे पहले भी कई बार प्रवासी मजदूर ज्यादा पैसे कमाने की लालच में विदेश जाकर फंस चुके हैं।काफी मशक्कत के बाद उनकी वतन वापसी कराई गई। इसके बावजूद प्रवासी मजदूर पुरानी घटनाओं से सबक नहीं ले रहे हैं। गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के मधगोपाली पंचायत (दूधपनिया गांव) निवासी प्रवासी श्रमिक विजय कुमार महतो की मौत 23 अक्टूबर 2025 को सऊदी अरब में हुई है। घटना के तीन माह बाद भी शव अभी तक देश नहीं लाया जा सका है और न ही परिजनों को मुआवजा मिला है। दुबई में फंसे मजदूरों में गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत चिचाकी के रोशन कुमार और अजय कुमार,बगोदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत के तिरला के राजेश महतो और मंडरो, डुमरडेली के अजय कुमार, बोकारो जिले के पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कंजकीरो के डालेश्वर महतो, हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत खेदाडीह के जागेश्वर महतो और फालेन्द्र महतो, सिरैय के बैजनाथ महतो, पारजोरिया के दिलीप महतो, गंगाधर महतो और त्रिलोकी महतो, चकचुको बसरिया के दीपक कुमार, गोरहर थाना क्षेत्र अंतर्गत के गोरहर के रोहित महतो और सेवा महतो शामिल हैं। ये सभी मजदूर पिछले ऑक्टूबर 2025 को ईएमसी की कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन में काम करने के लिए दुबई गए थे, लेकिन पिछले तीन महीने से किसी भी मजदूर को ठीक से वेतन नहीं मिला है।जिसकी वजह से सभी मजदूर खाने के लिए मोहताज हो गए हैं।




