पूर्व विधायक पूर्णिमा सिंह ने बिना नाम लिए संजीव-रागिनी पर बोला हमला 

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पूर्व विधायक पूर्णिमा सिंह ने बिना नाम लिए संजीव-रागिनी पर बोला हमला

 

जो लोग पर्दे के पीछे से झरिया को जबरन खाली कराने में लगे हैं वही लोग तिसरा की घटना के बाद बहा रहे घड़ियाली आंसू 

 

झरिया की सत्ता के लोग एवं आउटसोर्सिंग प्रबंधन दोनों एक ही थाली के चट्टे बट्टे, विरोध का दिखावा करने वाले भाई हैं आउटसोर्सिंग में पार्टनर 

डीजे न्यूज, तिसरा(धनबाद) : जो लोग पर्दे के पीछे से झरिया को जबरन खाली कराने में लगे हैं वही लोग आज झरिया के तिसरा की घटना के बाद दिखावा करने को घड़ियाली आंसू बहाकर लोगों को दिग्भ्रमित करने में लगे हैं। झरिया की सत्ता के लोग एवं आउटसोर्सिंग प्रबंधन दोनों एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं, जिसके चलते कुछ महीने में ये पता चलेगा कि ये शहर तथा गांव कभी झरिया में था। ये बाते झरिया की पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने रविवार को रघुकुल परिवार की ओर से जामाडोबा कालीमेला दामोदर नदी घाट पर आयोजित वनभोज सह मिलन समारोह में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में किसी की हिम्मत नहीं हुई कि झरिया में एक भी घर को जबरन खाली करा दे, लेकिन आज आउटसोर्सिंग के ठेकेदार झरिया के सत्ता पक्ष के संरक्षण में लोगों को गुंडों के बल पर जबरन भगाने का काम कर रहे हैं या फिर उसके आतंक से सभ्य लोग भागने को मजबूर हैं।

उन्होंने धुर विरोधी पर झरिया के लोगों को दिग्भ्रमित कर छलने का काम करने तथा दिखावे का आंदोलन करने का आरोप लगाया। कहा कि एक ही घर से चार लोग विधानसभा के सदस्य बने इसके बाद भी झरिया की स्थिति क्या है ये किसी से छुपी नहीं है। आज इनके कार्यकाल में इसके संरक्षण के कारण इसके भाई का आउटसोर्सिंग पार्टनर झरिया में आतंक फैलाने में लगा है। आज झरिया की स्थिति यह है कि गुंडे कर्मचारी को पीट रहे है, थाने में घुसकर पुलिस वाले पीट रहे हैं, रोड एक्सीडेंट बढ़ गया है, लोग घर से बेघर हो रहे हैं। इन सब बातों से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। तिसरा की घटना के बारे में कहा कि इनके संरक्षण के बलबूते आउटसोर्सिंग के गुंडों का इतना मनोबल बढ़ गया है कि वे खुलेआम बीसीसीएल के अधिकारियों और कर्मचारियों को दौड़ा दौड़ा कर पीटते हैं। भयभीत अधिकारी शिकायत करने से डर रहे हैं। मामले में इनकी पोलपट्टी खुल न जाए इसके चलते आउटसोर्सिंग परियोजना को बंद कराया गया, लेकिन बिना नतीजा के उसी परियोजना को चालू भी कर दिया गया। उन्होंने अपने विरोधी को कहा कि वे गिरगिट की तरह रंग बदलना छोड़कर ईमानदारी से अगर लोगों के लिए काम करना है तो वे पहले अपने भाई को आउटसोर्सिंग से पार्टनरशिप से हटाएं, क्योंकि आउटसोर्सिंग का समर्थन और विरोध दोनों एक साथ नहीं चल सकता है। डिगवाडीह में निर्मित की जा रही अस्पताल के चालू होने के बारे में कही कि अस्पताल को व्यवस्था के साथ चालू कराने में वे लगी हुई हैं। जल्द ही रैयत का हक को लेकर झरिया के लोगों को एक खुश खबरी मिलेगी, लेकिन ये बातें हम मीडिया को नहीं बताएंगे क्योंकि उनके विरोधी पढ़े लिखे तो हैं नहीं, बस आपके माध्यम से कॉपी कर अधिकारियों के पास काम कराने पहुंच जाएंगे। उन्होंने झरिया के लोगों से कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। वे संघर्ष करें वे और उनका रघुकुल परिवार ईमानदारी से उसके साथ खड़ा मिलेगा।

मौके पर जमसं बच्चा सिंह गुट के महामंत्री अभिषेक सिंह, हर्ष सिंह, सुभाष सिंह, रामकृष्ण पाठक, विजय सिंह, उमाशंकर शाही, मल्लू सिंह, सुबोध सिंह, कुमार गौरव उर्फ सोनू, मुख्तार खान, रविन्द्र वर्मा, भगवान दास, अब्दुल करीम अंसारी, सुंदर लाल महतो, शैलेन्द्र द्विवेदी, दिनेश सिंह, दीपक सिंह, चंदन महतो, आफताब आलम, जय कुमार,निरंजन जी, शिवदत्त कुमार, सुंदर यादव, हरिपद महतो, कालीचरण महतो, सपन बनर्जी, रविन्द्र प्रसाद, अशोक वर्णवाल, रत्नेश यादव, किशोर कुमार, शिवप्रकाश सिंह, अजीत महतो, मुन्ना सिंह, विनोद सिंह, रूपक सिंहा, पिंकी सिंह, सूरज सिंह आदि थे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में भोला यादव, शंकर लोहार, आजाद चौधरी, उपेंद्र यादव, जय कुमार, कारण साव, राजन बाउरी, मंगल रजवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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