



एमएसयूआई ने छात्रहित के मुद्दों पर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

डीजे न्यूज, रांची: झारखंड में ओबीसी छात्रवृत्ति की लंबित राशि एवं विश्वविद्यालयों में उत्पन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर मंगलवार को एनएसयूआई झारखंड के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल संतोष गंगवार से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।
राजभवन द्वारा आमंत्रित प्रतिनिधियों की ओर से विश्वविद्यालय प्रभारी सह प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल कृष्ण चौधरी ने राज्यपाल से मुलाकात कर छात्रहित से जुड़े गंभीर विषयों को प्रमुखता से रखते हुए ज्ञापन समर्पित किया।
इस अवसर पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव, प्रदेश संगठन प्रभारी सह प्रदेश उपाध्यक्ष संकेत सुमन तथा प्रदेश महासचिव मुशर्रफ हुसैन भी मौके पर उपस्थित रहे।
प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को अवगत कराया कि राज्य में लगभग 4.50 लाख छात्र-छात्राएँ ओबीसी छात्रवृत्ति से सीधे प्रभावित हैं। छात्रवृत्ति के भुगतान में हो रही देरी के कारण विद्यार्थियों की फीस जमा करने, परीक्षा फॉर्म भरने, हॉस्टल व्यवस्था, अध्ययन सामग्री एवं नियमित पढ़ाई पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य संकट की स्थिति में है।
त्वरित समाधान की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि छात्रहित में शीघ्र हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ, ताकि छात्रवृत्ति का भुगतान जल्द सुनिश्चित हो सके और विश्वविद्यालयों में उत्पन्न शैक्षणिक अस्थिरता को भी तत्काल दूर किया जा सके।
संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक छात्रहित में यह प्रयास लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
राज्यपाल ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
राज्यपाल ने प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने अपने अतिरिक्त मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर संभावित कार्रवाई एवं आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाई जाए।
प्रमुख मांगें
ओबीसी छात्रवृत्ति (सत्र 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) का भुगतान अविलंब सुनिश्चित किया जाए।
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र कराए जाएँ।
विश्वविद्यालयों में स्थायी नियुक्तियाँ (कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक आदि) तत्काल की जाएँ।
शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर सत्र को नियमित किया जाए।
“एक व्यक्ति–एक पद” लागू करते हुए आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।



