आईआईटी (आईएसएम) में दो दिवसीय पेडागॉजी कार्यशाला का शुभारंभ

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आईआईटी (आईएसएम) में दो दिवसीय पेडागॉजी कार्यशाला का शुभारंभ

डीजे न्यूज, धनबाद: आइआइटी आइएसएम के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा शिक्षा मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम डिज़ाइन और उद्यमिता के लिए क्षमता निर्माण
(सीबीडीई) के अंतर्गत दो दिवसीय पेडागॉजी वर्कशॉप का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया। उद्घाटन समारोह एफडीसी कॉन्फ्रेंस हॉल-1, एमएमटीटीसी, आई2एच भवन, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सुधीर वरदराजन, सीबीडीई कार्यक्रम के प्रोग्राम डायरेक्टर रहे, जबकि प्रो. सुकुमार मिश्रा, निदेशक, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने मुख्य संरक्षक के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

मुख्य अतिथि प्रो. सुधीर वरदराजन ने अपने संबोधन में सीबीडीई कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षकों और छात्रों को डिजाइन थिंकिंग और उद्यमिता से जुड़ी जरूरी क्षमताएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम फिलहाल देश के 42 संस्थानों में संचालित हो रहा है, जिनमें आईआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम और कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य छात्रों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करना है।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि आज के समय में जब छात्रों के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स के जरिए हर तरह की जानकारी आसानी से उपलब्ध है, तब शिक्षकों के सामने चुनौती यह है कि वे छात्रों को इससे आगे की समझ और सोच दे सकें। उन्होंने कहा, “समाधान यह नहीं है कि एआई के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए, बल्कि शिक्षकों के ज्ञान को लगातार अपडेट किया जाए, ताकि वे छात्रों को एआई से बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला इन पहलुओं पर सार्थक चर्चा करेगी।

इससे पहले एमएमटीटीसी की प्रोग्राम डायरेक्टर प्रो. मृणालीनि पांडेय ने स्वागत भाषण में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी और बताया कि अब तक इस कार्यक्रम से देशभर के लगभग 500 संस्थानों के 5,000 से अधिक शिक्षक लाभान्वित हो चुके हैं।

सीबीडीई कार्यक्रम की स्थानीय समन्वयक प्रो. शिखा सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में आईआईईएसटी शिबपुर, एनआईटी कालीकट, एनआईटी राउरकेला और जीसीईटी बिलासपुर सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसा ज्ञान और तरीका देना है, जिसे वे पढ़ाते समय उद्योग से जोड़ सकें, साथ ही मिलकर ऐसी शिक्षण पद्धति विकसित करना है जिससे छात्रों को सीधा लाभ मिल सके।

यह दो दिवसीय पेडागॉजी वर्कशॉप 3 जनवरी को भी विभिन्न सत्रों और संवादात्मक गतिविधियों के साथ जारी रहेगी।

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