

























































परसिया में आईआईटी (आईएसएम) ने शुरू किया वर्षा जल संचयन और एसटीपी–ईटीपी प्रशिक्षण

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर द्वारा शुक्रवार को पांडरकनाली साउथ पंचायत, परसिया में दो महत्वपूर्ण क्षमता वर्धन कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड फाउंडेशन केंद्र (एनजीओ) के सहयोग से तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), भारत सरकार के प्रायोजन में आयोजित किए जा रहे हैं। शुरू किए गए कार्यक्रम—“वर्षा जल संचयन : जल संरक्षण का व्यावहारिक तरीका” और “एसटीपी एवं ईटीपी संचालन और मेंटेनेंस : अपशिष्ट जल प्रबंधन में स्थानीय क्षमता बढ़ाना”—का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को व्यावहारिक और उपयोगी प्रशिक्षण देना है।
उद्घाटन सत्र में आईआईटी (आईएसएम) के वरिष्ठ शिक्षकों की उपस्थिति रही, जिनमें प्रो. आलोक सिन्हा, विभागाध्यक्ष, ईएसई विभाग एवं ईआईएसीपी केंद्र के समन्वयक; प्रो. सुनील कुमार गुप्ता, प्रोफेसर (एचएजी) एवं डीन (स्टूडेंट वेलफेयर); तथा प्रो. सुरेश पंडियन ई., एसोसिएट प्रोफेसर एवं सह-समन्वयक शामिल थे। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि संस्थान वैज्ञानिक ज्ञान को समुदाय तक पहुँचाने और ग्रामीण विकास में अपनी भूमिका को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय के प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। डॉ. जयदेव महतो, कार्यकारी निदेशक, झारखंड फाउंडेशन केंद्र ने इसे संस्थान और ग्रामीण समाज के बीच मजबूत साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। बीडीओ और पंचायत मुखिया ने आईआईटी (आईएसएम) द्वारा ग्राम स्तर पर इस तरह की पहल लाने के लिए आभार व्यक्त किया। पंचायत प्रतिनिधियों में चमेली देवी, लक्ष्मी देवी और सीमा देवी भी मौजूद रहीं।
अपने संबोधन में प्रो. सिन्हा ने ईआईएसीपी—पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम—के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थायी विकास तभी संभव है जब वैज्ञानिक जानकारी सरल रूप में लोगों तक पहुँचे और उन्हें व्यवहार में अपनाया जा सके। प्रो. गुप्ता ने जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन को ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बताया। प्रो. पंडियन ने कहा कि लगातार व्यावहारिक प्रशिक्षण से ही समुदाय विभिन्न प्रणालियों को समझकर आत्मनिर्भर बन पाता है।
वर्षा जल संचयन कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों और किसानों को कम लागत और आसानी से अपनाए जाने वाले तकनीकी उपाय सिखाता है, जबकि एसटीपी–ईटीपी प्रशिक्षण के तहत अपशिष्ट जल उपचार प्रक्रियाओं को सरल भाषा और लाइव डेमो के माध्यम से समझाया जा रहा है। प्रतिभागियों को आईआईटी (आईएसएम) परिसर में स्थापित आरडब्ल्यूएच और एसटीपी प्रणालियों के साथ-साथ एक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का भ्रमण भी कराया जाएगा।
यह कार्यक्रम निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा, उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार तथा प्रो. आलोक सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। समन्वय श्री बिश्वजीत दास, कार्यक्रम अधिकारी, ईआईएसीपी केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण झारखंड में सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करना है।




