

























































गिरिडीह में हथियारबंद माओवादी दंपती का आत्मसमर्पण, भाकपा (माओवादी) को बड़ा झटका

गिरिडीह पुलिस की बड़ी सफलता : एरिया कमेटी सदस्य शिवा और दस्ता सदस्य उर्मिला ने कहा-अब मुख्यधारा से जुड़कर जीना चाहते हैं
डीजे न्यूज, गिरिडीह : झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान को बुधवार को एक और बड़ी सफलता मिली है। गिरिडीह पुलिस के समक्ष मंगलवार को भाकपा (माओवादी) संगठन के दो सक्रिय उग्रवादियों एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ शिवा और उसकी पत्नी, दस्ता सदस्य सरिता हांसदा उर्फ उर्मिला ने आत्मसमर्पण किया। दोनों ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नई दिशा–एक नई पहल से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इनके आत्मसमर्पण से गिरिडीह समेत आसपास के जिलों में नक्सली गतिविधियों को करारा झटका लगा है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय, गिरिडीह में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब भाकपा (माओवादी) के एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ शिवा (25 वर्ष) और उसकी पत्नी दस्ता सदस्य सरिता हांसदा उर्फ उर्मिला (19 वर्ष) ने आत्मसमर्पण किया।
दोनों ने उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव, पुलिस अधीक्षक डॉ बिमल कुमार, सीआरपीएफ 154 बटालियन के कमांडेंट, डुमरी एसडीपीओ, और अन्य पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।
यह आत्मसमर्पण गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक झारखंड, और जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमिटी के निर्देश के तहत नई दिशा – एक नई पहल नीति के अंतर्गत कराया गया।
आत्मसमर्पण का सफर : नक्सली से मुख्यधारा तक की कहानी
पुलिस के अनुसार, शिवलाल हेम्ब्रम वर्ष 2017 में नूनूचंद महतो के माध्यम से संगठन में शामिल हुआ था। प्रारंभ में वह संतरी ड्यूटी और भोजन पकाने का काम करता था। बाद में उसे करम दा उर्फ विवेक का अंगरक्षक बनाया गया।
वर्ष 2022 में शिवलाल को पार्टी ने एरिया कमेटी सदस्य का पद दिया और 2023 में उसे लैपटॉप चलाने की ट्रेनिंग दी गई, जिसके माध्यम से वह नक्सल संगठन के गुप्त संदेश और योजनाओं को तैयार करता था।
दस्ता सदस्य सरिता हांसदा वर्ष 2020 में जया दी द्वारा संगठन में लाई गई थी। वह संगठन के लिए खाना बनाने और संदेश पहुंचाने का कार्य करती थी। 2024 में शिवलाल और सरिता ने संगठन के भीतर ही विवाह किया।
धीरे-धीरे संगठन के अंदर बढ़ती शोषण प्रवृत्ति, ग्रामीणों पर अत्याचार और महिला सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार से दोनों निराश हो गए। करम दा के मारे जाने के बाद दोनों का मनोबल टूट गया और वे संगठन छोड़ने के निर्णय पर पहुँचे।
गिरिडीह पुलिस ने लगातार उनके परिवार से संपर्क बनाए रखा और आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। पुलिस ने परिजनों को आश्वस्त किया कि आत्मसमर्पण के बाद दोनों को सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ मिलेगा और किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं होगी। अंततः दोनों ने पुलिस से संपर्क कर आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
दर्ज थे कई गंभीर मामले-हथियार, विस्फोटक और हमले के आरोप
आत्मसमर्पण करने वाले दोनों उग्रवादियों पर गिरिडीह, डुमरी, मधुबन, खुखरा, चतरोचट्टी और जगेश्वर विहार थानों में एक दर्जन से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
इन पर हत्या, पुलिस पर हमले, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट, और यूएपीए के तहत कई धाराएँ लगी हैं। दोनों पर आरोप है कि ये लोग संगठन के लिए हथियार लूट, लेवी वसूली और विस्फोटक सामग्रियों को छुपाने जैसे कार्यों में सक्रिय थे।
पुलिस का बयान : गिरिडीह लगभग नक्सलमुक्त होने की दिशा में

पुलिस अधीक्षक गिरिडीह ने कहा कि शिवलाल और सरिता का आत्मसमर्पण जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे अन्य उग्रवादियों को भी प्रेरणा मिलेगी। झारखंड सरकार की ‘नई दिशा–एक नई पहल’ नीति का उद्देश्य ऐसे ही भटके युवाओं को मुख्यधारा में लौटाना है। उन्होंने बताया कि गिरिडीह पुलिस निरंतर नक्सल विरोधी अभियान चला रही है, जिसके परिणामस्वरूप जिले में नक्सल घटनाओं में भारी कमी आई है। पिछले वर्ष 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली रामदयाल महतो ने भी गिरिडीह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।



