

बांकुड़ा में तीन दिवसीय बाजरा खेती प्रशिक्षण संपन्न, वैज्ञानिक खेती के तरीके, कटाई के बाद की प्रक्रिया और उद्यमिता से जुड़ी राहों से अवगत हुए ग्रमीण
डीजे न्यूज, धनबाद:
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के सॉलतोरा प्रखंड अंर्तगत सलमा ग्राम पंचायत में आयोजित तीन दिवसीय उच्च गुणवत्ता वाले बाजरा खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। यह कार्यक्रम कोल इंडिया लिमिटेड की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल के तहत आयोजित किया गया था और इसे आईआईटी -आईएस एम धनबाद ने एक सीएसआर-प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत लागू किया।
इस पहल का उद्देश्य जनजातीय महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना था ताकि वे टिकाऊ बाजरा खेती के माध्यम से अपनी आजीविका बढ़ा सकें और उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम में जलवायु अनुकूल खेती, पोषण सुरक्षा, वैल्यू एडिशन और डिजिटल मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया गया।
तीन दिन तक चले प्रशिक्षण सत्र डॉ. सिबाजी बनर्जी, सहायक प्रोफेसर, एग्रोनॉमी, बिधान चंद्रा कृषि विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल द्वारा संचालित किए गए। उन्होंने ग्रामीणों को वैज्ञानिक खेती के तरीके, कटाई के बाद की प्रक्रिया और उद्यमिता से जुड़ी राहें समझाईं।
प्रशिक्षण को लेकर स्थानीय समुदाय की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। ग्राम पंचायत सदस्य, स्वयं सहायता समूह, सचिव और उप-सचिव, कृषक बंधु, स्वास्थ्यकर्मी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कृषि अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसमें हिस्सा लिया। 100 से ज्यादा ग्रामीणों ने बाजरा खेती अपनाने की इच्छा जताई, जिससे टिकाऊ और पोषण-केंद्रित खेती को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
इस परियोजना का नेतृत्व प्रो. नीलाद्री दास (प्रधान अनुसंधानकर्ता) और प्रो. रश्मि सिंह (सह-प्रधान अनुसंधानकर्ता) ने किया। क्रियान्वयन टीम में रोहित सिंह, सनी कुमार, सुमना बनर्जी और फ़िरदौस अंसारी शामिल रहे।
यह पहल कोल इंडिया लिमिटेड की समावेशी और टिकाऊ ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें क्षमता निर्माण, आजीविका संवर्धन और जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है।

