

डायरिया से ग्रामीण बेहाल, स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप
टुंडी में डायरिया का दायरा बढ़ा, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

सिविल सर्जन ने संभाली कमान, दवाइयों की कमी न होने का निर्देश
डीजे न्यूज, टुंडी(धनबाद) : पूर्वी टुंडी प्रखंड के लटानी आदिवासी टोला से शुरू हुआ डायरिया का प्रकोप लगातार नए गांवों में पांव पसार रहा है। पहले सिंगरायडीह और अब घोषालडीह गांव तक यह बीमारी पहुंच गई है। हालात बिगड़ते देख शनिवार को जिले के सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही बरतने और समय रहते पहल नहीं करने का आरोप लगाया।
सिविल सर्जन के निरीक्षण में चली जांच अभियान
टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो की सूचना पर सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा शनिवार को सिंगरायडीह पहुंचे। यहां डॉक्टरों की टीम ने घर-घर जाकर मरीजों की जांच की और गंभीर रूप से पीड़ित लोगों को 108 एंबुलेंस से दुबराजपुर स्थित टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भेजा। वहीं, शनिवार की रात घोषालडीह गांव में भी डायरिया के कई मामले सामने आए। सूचना मिलते ही रविवार को डॉक्टरों की टीम गांव पहुंची और चार मरीजों को सीएचसी टुंडी भेजा।
एक दर्जन से अधिक मरीज भर्ती, दवा उपलब्ध कराने का निर्देश
रविवार को सिविल सर्जन डॉ. विश्वकर्मा ने सीएचसी टुंडी का निरीक्षण किया। यहां भर्ती एक दर्जन से अधिक डायरिया पीड़ितों की हाल-चाल ली। निरीक्षण के दौरान उपस्थित चिकित्सक डॉ. अलीमुद्दीन से दवाओं की उपलब्धता पर जानकारी ली गई। सिविल सर्जन ने सख्त निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में दवा की कमी नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाजार से भी तत्काल दवाइयां खरीदकर मरीजों को उपलब्ध कराने को कहा गया।
अस्पताल में भर्ती मरीज
टुंडी सीएचसी में इलाजरत मरीजों में घोषालडीह की गुड़िया भोगताइन (25), आदित्य भोक्ता (12), सिंगरायडीह के अजीत किस्कू (10), उर्मिला कुमारी (21), सुमन कुमारी (14), लुखीमुनी देवी (45), सावरन किस्कू (50), शिवानी कुमारी (25), लुखीमुनी मरांडी (70), उपेंद्र किस्को (40), माधुरी मुर्मू (26), ललिता देवी (50) समेत अन्य ग्रामीण शामिल हैं।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो डायरिया का संक्रमण और अधिक गांवों में फैल सकता है।
फैक्ट फोकस
प्रकोप की शुरुआत : लटानी आदिवासी टोला से
फैला कहां तक : सिंगरायडीह और घोषालडीह
अस्पताल में भर्ती : 12 से अधिक मरीज
मुख्य मरीज : महिलाएं व बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
सिविल सर्जन का निर्देश : दवा की कोई कमी नहीं होनी चाहिए
