

शिक्षकों के स्थानांतरण नीति में संशोधन की मांग, असाध्य बीमारी व गृह जिला में पोस्टिंग पर जोर
झारोटेफ के प्रदेश अध्यक्ष ने शिक्षा सचिव को ज्ञापन देकर उठाए सवाल, भाषा की बाध्यता समाप्त करने और संविदा सेवाओं को शामिल करने की सिफारिश

डीजे न्यूज, रांची : झारखंड स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह को झारोटेफ के प्रांतीय अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह ने शिक्षकों के स्थानांतरण नीति से जुड़ी विभिन्न शर्तों पर पुनर्विचार के लिए अनुरोध पत्र सौंपा है। पत्र में कहा गया है कि विभाग ने ऐच्छिक स्थानांतरण की व्यवस्था शुरू कर सराहनीय पहल की है, लेकिन कुछ बिंदुओं पर संशोधन आवश्यक है ताकि वास्तविक परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।
असाध्य बीमारी, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने और गृह जिला में स्थानांतरण की उठी मांग
अनुरोध पत्र में उल्लेख किया गया है कि पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में शिक्षक को न केवल पति/पत्नी के पदस्थापित जिले में बल्कि गृह जिले में स्थानांतरण का विकल्प मिलना चाहिए। इससे बार-बार स्थानांतरण की स्थिति से बचा जा सकेगा।
असाध्य बीमारी की स्थिति में जिला स्तरीय मेडिकल कमेटी से सत्यापन के बाद भी आवेदन खारिज कर दिए जाने पर चिंता जताई गई। पश्चिम सिंहभूम जिले में शिक्षकों के सभी आवेदन अस्वीकृत कर दिए जाने को उदाहरण के रूप में रखा गया। पत्र में कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों में भाषा की बाध्यता समाप्त कर राहत दी जानी चाहिए।
महिला और वरिष्ठ शिक्षकों को गृह जिले में पोस्टिंग का अवसर देने की सिफारिश
अनुरोध पत्र में यह भी कहा गया है कि 2024 की तरह पारा शिक्षक, आंगनबाड़ी कर्मी, नर्स और संविदा सेवाओं को भी पति-पत्नी की शर्त में शामिल किया जाए। साथ ही सभी शिक्षकों को जीवन में कम से कम एक बार गृह जिले में स्थानांतरण का अवसर दिया जाना चाहिए। विशेष रूप से सभी महिला शिक्षकों और 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष शिक्षकों को उनके गृह जिले में स्थानांतरण का अवसर दिए जाने की मांग की गई है। इसके अलावा अंतर जिला ही नहीं, बल्कि जिले के भीतर भी असाध्य बीमारी जैसी विशेष परिस्थितियों में स्थानांतरण की सुविधा देने पर बल दिया गया है।
